टिप्पणियों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है लेकिन अपने विद्यार्थियों के लिए आज हम एक ऐसा लेख पेश करेंगे जो हिंदी ब्लॉग जगत को आईना भी दिखाता है और सीखने वालों को बहुत कुछ सिखाता भी है। ज़रूरत बस एक नज़र की है। आईना देखने के लिए भी नज़र चाहिए और उसमें मौजूद ‘तत्व‘ को ग्रहण करने के लिए भी नज़र चाहिए।
जनाब सतीश सक्सेना जी का यह लेख मुझे बेहद पसंद है और इतना ज़्यादा पसंद है कि बिना उनसे औपचारिक अनुमति लिए ही उसे हम यहां पेश कर रहे हैं। यह औपचारिकता तब के लिए छोड़ दी है जबकि वह ख़ुद यहां कमेंट करने आएंगे।
...तो साहिबान, क़द्रदान लीजिए आज आपके सामने पेश है ‘टिप्पणी के बारे में सबसे बड़ा सच‘
साभार : http://satish-saxena.blogspot.com/2010/11/blog-post_24.html
जनाब सतीश सक्सेना जी का यह लेख मुझे बेहद पसंद है और इतना ज़्यादा पसंद है कि बिना उनसे औपचारिक अनुमति लिए ही उसे हम यहां पेश कर रहे हैं। यह औपचारिकता तब के लिए छोड़ दी है जबकि वह ख़ुद यहां कमेंट करने आएंगे।
...तो साहिबान, क़द्रदान लीजिए आज आपके सामने पेश है ‘टिप्पणी के बारे में सबसे बड़ा सच‘
( यह लेख एक व्यंग्य है )टिप्पणियां देने की विवशता - सतीश सक्सेनाकिसी भी लेख की महत्ता बिना टिप्पणियों के बेकार लगती है ,लगता है किसी वीराने में आ गए हैं ! और टिप्पणिया चाहने के लिए टिप्पणिया देनी बहुत जरूरी हैं ! सो हर लेख के तुरंत बाद ५० अथवा उससे अधिक जगह टिप्पणी करनी होती है तब कहीं २५ -३० टिप्पणियों का जुगाड़ होता हैं ! :-((
अब लम्बा लेख कैसे पढ़ें ..समझ ही नहीं आता ! ऐसे लेख पर टिप्पणी करने के लिए अन्य टिप्पणीकर्ता की प्रतिक्रिया देख कर उससे मिलती जुलती टिप्पणी ठोकना लगता होता है ! चाहे उस बेचारे का बेडा गर्क हो जाये :-)
- अगर किसी बहुत बेहतरीन लेख का कबाड़ा करना हो तो पहली नकारात्मक टिप्पणी कर दीजिये फिर देखिये उस बेचारे की क्या हालत होती है ! बड़े बड़े मशहूर लोग उसकी कापी करते चले जायेंगे !
और हम जैसे मूढ़ लोग अपने आप पर और अपनी संगत पर हँसेंगे ...दुआ करता हूँ कि कुछ लेख को ध्यान से पढने वाले भी आ जाएँ तो इतनी मेहनत करना सार्थक हो ! मेरे जैसे मूढमति, टिप्पणी न करें तो ठीक ही होगा सो आज से टिप्पणी कम करने का प्रयत्न करूंगा , जिससे बदले में टिप्पणी न मिलें और दुआ मानूंगा कि कम लोग पढ़ने आयें मगर वही आयें जो मन से पढ़ें !
- किसी अन्य टिप्पणी कर्ता जिसे आप विद्वान् समझते हों की टिप्पणी की कापी करना अच्छा लगेगा और लोग आपकी टिप्पणी को ऐवें ही नहीं लेंगे !
:-))))
साभार : http://satish-saxena.blogspot.com/2010/11/blog-post_24.html
