Wednesday, April 13, 2011

आप ब्लॉगिंग को कितनी गहराई से जानते हैं ? The Lesson

दुनिया में जब से दोस्ती है तभी दुश्मनी भी है और जब दुश्मनी है तो दुश्मनों से इंतक़ाम भी है । लोगों ने तरह तरह से अपने दुश्मनों से इंतक़ाम लिया है । किसी ने अपने दुश्मनों को एक झटके में मार डाला और किसी ने उन्हें तड़पा तड़पाकर मारा । किसी ने उनसे युद्ध किया और उन्हें खुलेआम मारा और किसी ने उन्हें साज़िशन मारने के लिए लाख का महल बनाया। किसी ने बाप को मारकर उसकी औलाद को तबाह कर दिया और किसी ने अपने दुश्मन को तो ज़िंदा रखा और उसकी औलाद को मार डाला ताकि वह तड़पता रहे। किसी ने इससे भी बदतर किया और यह किया कि अपने दुश्मन के बच्चों को बड़ा प्यार दिया , उन्हें दिल खोलकर रक़में दीं और ऐसे साथी उसके दोस्त बना दिए जिनके साथ रहकर वह जुआरी और शराबी बन गया और सारी जायदाद गंवाकर अपने साथ बाप को भी कंगाल कर दिया। चरित्र की दौलत भी गई और मालो-ज़र भी गया।
ये सभी तरीक़े पुराने हो चुके हैं । अब सहशिक्षा, कंप्यूटर और मोबाईल का युग है।
सहशिक्षा तो आजकल माँ-बाप ख़ुद ही अपने ख़र्चे पर दिला रहे हैं । इसके बावजूद भी किसी-किसी का चरित्र नष्ट नहीं हो पाता। अगर आपका दुश्मन भी एक ऐसा ही आदमी है तो आप उसे आराम से बर्बाद कर सकते हैं और उसे कभी पता भी नहीं चलेगा और किसी भी देश का क़ानून आपको इल्ज़ाम तक न दे पाएगा।
इसके लिए आपको करना यह होगा कि पहले आप अपने दुश्मन को दोस्त बनाईये, फिर उसे राष्ट्रवाद की डोज़ दीजिए या जो भी आयडियोलॉजी उसे पसंद हो, उसी लाइन पर उसे आगे बढ़ाएं और जब आप ये सब काम करें तो उस समय आप अपने कंप्यूटर के सामने बैठे होने चाहिएं और उसकी स्क्रीन पर फ़ेसबुक, ट्विटर या ऑरकुट खुला हुआ होना चाहिए।
जिज्ञासा और उत्सुकता आदमी का स्वभाव है । किसी न किसी दिन वह आपसे ख़ुद ही पूछेगा कि आख़िर यह है क्या ?
तब आप बताएं कि ये पूरी दुनिया में बिना कुछ किए ही मशहूर होने का ज़रिया है ।
कौन ऐसा है जो शोहरत न चाहता हो ?
बस उसके पूछते ही आप तुरंत उसका अकाउंट बना डालिए और अगर आप उसे कुछ ज़्यादा ही बर्बाद देखना चाहते हैं तो फिर इन सभी साइट्स के बजाय आप उसके लिए केवल blogger.com पर एक हिंदी ब्लॉग बना दीजिए , बस ।
अब आपको कुछ और करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, धीरे-धीरे वह खुद ही बर्बाद हो जाएगा। जीवन इंसान के पास समय के रूप में होता है । वह अपना समय हिंदी ब्लॉगिंग में लगाएगा और हिंदी ब्लॉगिंग में समय लगाने के बदले में ब्लॉगर को फ़ायदा कुछ मिलता नहीं है । इस तरह आपने उसका जीवन एक ऐसी जगह झोंक दिया जहाँ से उसे कुछ ठोस कभी नहीं मिलेगा लेकिन उसे हमेशा यही आभास होता रहेगा जैसे कि उसे कुछ मिल रहा है ।
अव्वल तो यहाँ कोई टिप्पणी तक भी कम ही देता है और अगर कोई दे भी दे तो उसका ऐतबार ही नहीं है कि यह टिप्पणी देने से पहले उसने लेख पढ़ भी लिया था या नहीं ?
'टिप्पणी में टिप्पणीकार के वास्तविक विचार हमेशा नहीं होते' यह एक सर्वमान्य तथ्य है। वह टिप्पणियाँ पाकर खुश होता रहेगा और जब तक उसे सच्चाई का पता चलेगा तब तक वह ब्लॉगिंग के नशे का आदी हो चुका होगा।
वह बर्बादी के इस चंगुल से कभी निकल ही न सके। इसके लिए आप उसे ब्लॉगर मीट का चस्का भी लगा दीजिए । ब्लॉगर मीट के बाद पीने पिलाने का दौर चलता ही है और सौ ख़राबियों की एक जड़ यह शराब है ही। इस ब्लॉगर मीट ने ही हिंदी ब्लॉगिंग के चरित्र को गिराया है और आपके दुश्मन के चरित्र को भी यह निश्चित ही नष्ट कर देगी। नशे का आदी होने के बाद किसी दिन ड्राइविंग करते हुए वह खुद ही किसी ट्रक के नीचे जा घुसेगा और या तो वह मर ही जाएगा या फिर अपाहिज होकर वह मरने से भी बदतर जिंदगी जिएगा और तब भी वह ब्लॉगिंग न छोड़ पाएगा।
आपके लिए खुशी की बात यह है कि अभी तक इसे सायबर क्राइम में शामिल नहीं किया गया है और न ही कभी किया जाएगा।
अपने दुश्मनों को आधुनिक तरीक़े से ज़्यादा बड़ी तबाही दीजिए और अपना बड़प्पन साबित कर दीजिए।
आप ब्लॉगिंग को कितनी गहराई से जानते हैं, यही बात तय करती है कि आप कितने बड़े ब्लॉगर हैं ?

4 comments:

प्रवीण शाह said...

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तब आप बताएं कि ये पूरी दुनिया में बिना कुछ किए ही मशहूर होने का ज़रिया है । कौन ऐसा है जो शोहरत न चाहता हो ? बस उसके पूछते ही आप तुरंत उसका अकाउंट बना डालिए और अगर आप उसे कुछ ज़्यादा ही बर्बाद देखना चाहते हैं तो फिर इन सभी साइट्स के बजाय आप उसके लिए केवल blogger.com पर एक हिंदी ब्लॉग बना दीजिए , बस । अब आपको कुछ और करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, धीरे-धीरे वह खुद ही बर्बाद हो जाएगा। जीवन इंसान के पास समय के रूप में होता है । वह अपना समय हिंदी ब्लॉगिंग में लगाएगा और हिंदी ब्लॉगिंग में समय लगाने के बदले में ब्लॉगर को फ़ायदा कुछ मिलता नहीं है । इस तरह आपने उसका जीवन एक ऐसी जगह झोंक दिया जहाँ से उसे कुछ ठोस कभी नहीं मिलेगा लेकिन उसे हमेशा यही आभास होता रहेगा जैसे कि उसे कुछ मिल रहा है । अव्वल तो यहाँ कोई टिप्पणी तक भी कम ही देता है और अगर कोई दे भी दे तो उसका ऐतबार ही नहीं है कि यह टिप्पणी देने से पहले उसने लेख पढ़ भी लिया था या नहीं ?

'टिप्पणी में टिप्पणीकार के वास्तविक विचार हमेशा नहीं होते' यह एक सर्वमान्य तथ्य है। वह टिप्पणियाँ पाकर खुश होता रहेगा और जब तक उसे सच्चाई का पता चलेगा तब तक वह ब्लॉगिंग के नशे का आदी हो चुका होगा।

वह बर्बादी के इस चंगुल से कभी निकल ही न सके। इसके लिए आप उसे ब्लॉगर मीट का चस्का भी लगा दीजिए । ब्लॉगर मीट के बाद पीने पिलाने का दौर चलता ही है और सौ ख़राबियों की एक जड़ यह शराब है ही। इस ब्लॉगर मीट ने ही हिंदी ब्लॉगिंग के चरित्र को गिराया है और आपके दुश्मन के चरित्र को भी यह निश्चित ही नष्ट कर देगी। नशे का आदी होने के बाद किसी दिन ड्राइविंग करते हुए वह खुद ही किसी ट्रक के नीचे जा घुसेगा और या तो वह मर ही जाएगा या फिर अपाहिज होकर वह मरने से भी बदतर जिंदगी जिएगा और तब भी वह ब्लॉगिंग न छोड़ पाएगा।


हा हा हा हा,

डॉ० साहब,

बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?

हिन्दी ब्लागिंग सिखाने वाली विश्व की पहली ऑनलाइन यूनिवर्सिटी


इतना सुन्दर नाम रखा है ब्लॉग का... और भावी ब्लॉगर को यह सब लिख इतना डरा रहे हैं... भाग जायेगा बेचारा... ;(



...

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

पढ़ने की आदत छोड़ लिखने की बीमारी में सब बड़े ब्लोगर हो चुके हैं...पता नहीं कब कौन महान ब्लोगर हो जाये?
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

सलीम ख़ान said...

ब्लॉगर मीट ने ही हिंदी ब्लॉगिंग के चरित्र को गिराया है

अवनीश सिंह said...

पहले आप अपने दुश्मन को दोस्त बनाईये, फिर उसे राष्ट्रवाद की डोज़ दीजिए या जो भी आयडियोलॉजी उसे पसंद हो, उसी लाइन पर उसे आगे बढ़ाएं और जब आप ये सब काम करें तो उस समय आप अपने कंप्यूटर के सामने बैठे होने चाहिएं और उसकी स्क्रीन पर फ़ेसबुक, ट्विटर या ऑरकुट खुला हुआ होना चाहिए।
जिज्ञासा और उत्सुकता आदमी का स्वभाव है । किसी न किसी दिन वह आपसे ख़ुद ही पूछेगा कि आख़िर यह है क्या ?
तब आप बताएं कि ये पूरी दुनिया में बिना कुछ किए ही मशहूर होने का ज़रिया है ।
बहुत ही रोचक लेख
जानकारी के लिए धन्यवाद
http://www.avaneesh99.blogspot.com/